IMG_20170725_112655_1

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक का नाम :       तुम्हारे शरीर की बनावट

प्रकाशक : हिन्द पाकेट बुक्स ; नई दिल्ली

Acc. No. :  14043

मूल्य    : 70/-

                      इस पुस्तक में मैंने शरीर के बनावट के बारे में पढ़ा है कि कैसे हमारा शरीर पृथ्वी ,जल अग्नि, वायु और आकाश इन पाँच तत्वों से बना है और कैसे विज्ञान से जो शरीर-निर्माण के रहस्यों का पता चला है कि कैसे हमारा शरीर एक प्रकार ईंट, जिसे कोष (सेल) कहा जाता है उससे बना है | कोष प्रत्येक जीव जंतु , पेंड-पौधों आदि सभी के शरीरों का निर्माण करता है | कोष स्वयं एक जीवित इकाई है | पृथ्वी पर जीव कोष के रूप में ही प्रस्फुटित है | केंद्र (न्यूक्लियस) ही कोष के प्रण होते हैं | यह केंद्र प्रोटोप्लाज्म होता है, जो जीवन का मूल तत्व माना गया है | इसे जीवनी द्रव भी कहा जाता है | साथ ही मैंने इस पुस्तक में यह भी  पढ़ा  है कि हमारा शरीर एक अनुशासित ढंग से काम करता है | अनिशासन क्रम इस तरह है कि एक किस्म के बहुत सारे कोष एक साथ मिलकर एक रचना बनाते हैं जिसे उत्तक (टिशू) कहा जाता है |  हमारे शरीर में छ: उत्तक हैं :

१ हमारे शरीर की बाहरी त्वचा को ढकने वाली भीतर की मुलायम त्वचा उत्तक है |

२ दूसरा संयोजक उत्तक (कनेक्टिव टिशू) है | त्वचा के नीचे इस उत्तक का ढीला सा जाल फैला होता है |

३ हमारा खून भी उत्तक है |

४ शरीर की मांस पेशियाँ

५ स्नायु

६ नाड़ी

कोष मिलकर उत्तक बनाते है, उत्तकों से मिलकर अंगों का निर्माण होता है | और जब कोई अंग एक साथ मिलकर – जीवन को कायम रखने के लिए किसी क्रिया को अंजाम देते हैं तो, वह संस्थान (सिस्टम) कहलाते हैं |

द्वारा-

अद्वैता कुमारी

कक्षा

Advertisements